Thursday, 2 February 2017

शेखावाटी - मंडावा

शेखावाटी मंडावा 
शेखावाटी मंडावा  में भर्मण के लिए आज अपन मंडावा की सैर करेंगे।
मंडावा पहुँचने के लिए आप को जयपुर से लगभग 200 किमी का सफर करना पड़ेगा।  अगर आप देहली की तरफ से आते है तो, आप को लगभग 275 -280 किमी का सफर करना पड़ेगा। मंडावा शेखावाटी के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है।  विदेश से आने वाले पर्यटको के मानचित्र में जयपुर के बाद दूसरे स्थान पर आता है। मंडावा शेखावाटी के लगभग मध्य में स्थित है।  यहाँ की आबो हवा उष्ण कटिबंधीय होने के कारन फरवरी मार्च का महीना भर्मण के लिए बहूत ही उत्तम है। मंडावा आने वाले पर्यटक मंडावा , नवलगढ़ , फतेहपुर , इन तीन स्थानों को अपनी लिस्ट में प्रमुखता से रखते है।

क्या क्या देखें।
1. मंडावा फोर्ट
18 वीं. शताब्दी का मंडावा का किला जो वहां के शासक ठा. नवल सिंह ने बनवाया था।  ठा. नवल सिंह मंडावा के आलावा नवलगढ़ ठिकाने के भी राजा थे। किला बहूत ही सूंदर नक्कासी, गुम्बद, मीनारो के साथ बना हुवा है. आज भी अपने उसी स्वरूप में है।
मंडावा किले का आंतरिक भाग 
 2. मंडावा का चार बुर्ज कुआँ
ये कुआं जिसके चार बड़ी बड़ी मीनारें है, वास्तव में देखने लायक है। उस ज़माने की  कलाकृतियों में से एक सूंदर कलाकृति। इसके साथ साथ मंडावा के आस पास के गॉंवों में भी इस तरह के सूंदर दृश्य देखने को मिल जायेंगे।  पिछले साल की सलमान खान अभिनीत फिल्म बजरंगी भाई जान की शूटिंग मंडावा के पास स्थित एक गांव हनुमान पूरा में हुयी थी।  यहाँ के चप्पे चप्पे में आर्ट है।  इसीलिए इसे ओपन आर्ट गैलरी के नाम से भी जाना जाता है।
चार मीनार वाला कुआँ
3. हवेलियां
हवेलियों में यहाँ पर शराफ़ों की हवेली, गोयनका हवेली, झुंझुनूवाला की हवेली प्रमुख हैं।
मुख्या बाजार का दृश्य 
ऐतिहासिक दृष्टि से मंडावा शेखावाटी क्षेत्र का ही भाग है और यह राजस्थान में अपनी खूबसूरत हवेलियों और जीवंत भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्द है। गुजरात और दिल्ली के मध्य रास्ते में पड़ने वाले इस शहर से पुराने समय में मध्य-पूर्व एशिया और चीन के व्यापारी इसी मार्ग से आते जाते थे जिसकी वजह से यह व्यापार का मुख्य केंद्र बन गया था। पर समय के साथ-साथ यहाँ के धनी वयापारी दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता जैसे बड़े शहरों की ओर प्रस्थान करने लगे। लेकिन उनहोंने मंडावा में जो हवेलियाँ बनवाई थीं, वे आज भी अपने वैभव से पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। इन हवेलियों की चित्रकारी और पच्चीकारी पुरे विश्व भर में प्रसिद्द हैं।



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