Posts

Showing posts with the label shekhawati

Featured Post

किसानों के लिए एक मोटर में दो मशीन चलाने का जुगाड़

किसान बचत कैसे करें  भारत में किसान के लिए बचत ही उसका मुनाफा है। क्योंकि बाजार उसके अनुकूल नहीं है। जो भी किसान फसल उगाता है, वो पशुपालन भी करता है। इस प्रकार किसान पशुपालन के द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित करता है। ये अतिरिक्त आय ही उसकी बचत होती है। किसान अपने छोटे छोटे खोजी तरीकों से बचत के तरिके ढूंढता रहता है। आज हम यहाँ ऐसे ही एक तरीके की बात कर रहे है। जी हाँ किसान की बचत का एक तरीका जिसे अपनाकर किसान अपनी बचत व श्रम का बेहतर तरीके से उपयोग का सकता है। हम बात करेंगे चारा काटने वाली मशीन की। हर किसान पशुपालन करता है। पशुओं की देखरेख में उसका बहुत सा समय जाया होता है। अगर ऐसे तरीके अपनाकर वह कार्य करे तो उसके धन व समय की बचत होगी। आज हम इस वीडियो में हरा चारा काटने वाली मशीन के प्रयोग की बात करेंगे।  एक मोटर से दो मशीन कैसे चलाएं  जैसा की वीडियो में दिखाया गया है, सबसे पहले आप बाजार से 5 X 3 फ़ीट के दो पत्थर लेकर आएं। फिर चारा काटने वाली मशीन के पैरों के नाप से उस पर चार छेद करके नट व बोल्ट की सहायता से मशीन को अच्छे से उस पत्थर पर फिक्स कर लें। ...

Accidental Death & Compensation: (Income Tax Return Required)

Image
Section 166 of the Motor act 1988 (Supreme Court Judgment under Civil Appeal No. 9858 of 2013 Car Accident Arising out of SLP (C) No. 1056 of 2008) Dt 31 Oct 2013. Accidental Death & Compensation: (Income Tax Return Required) अगर किसी व्यक्ति की accidental death होती है और वह व्यक्ति पिछले तीन साल से लगातार इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल कर रहा था तो उसकी पिछले तीन साल की एवरेज सालाना इनकम की दस गुना राशि उस व्यक्ति के परिवार को देने के लिए सरकार बाध्य है । जी हाँ , आपको आश्चर्य हो रहा होगा यह सुनकर लेकिन यह बिलकुल सही सरकारी नियम है , उदहारण के तौर पर अगर किसी की सालाना आय क्रमशः पहले दूसरे और तीसरे साल चार लाख पांच लाख और छः लाख है तो उसकी औसत आय पांच लाख का दस गुना मतलब पचास लाख रूपए उस व्यक्ति के परिवार को सरकार से मिलने का हक़ है। ज़्यादातर जानकारी के अभाव में लोग यह क्लेम सरकार से नहीं लेते हैं । जाने वाले की कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता है लेकिन अगर पैसा पास में हो तो भविष्य सुचारू रूप से चल सकता है । अगर लगातार तीन साल तक रिटर्न दाखिल नहीं कि...

शिव कौन है ? मृत्यु क्या है ? Who is Lord Shiva ?

Image
जमाना रंग अपना कुछ न कुछ सब पर चढ़ाता है।  मगर कुछ लोग रंग अपना चढ़ाते है ज़माने पर।। अमल से जिंदगी बनती तो हम सब ही बना लेते।  नवाजिश जब तलक उसकी न हो, कुछ हो नहीं सकता ।। यह कहानी स्वामी दयानंद के बचपन की है। उनके हदय में ऊपर लिखी दो जिज्ञासाएँ उत्पन्न हुयी थी।  इन जिज्ञासाओं का समाधान खोज कर उन्होंने ज़माने पर अपना रंग चढ़ा ही दिया। गुजरात (काठियावाड़)राज्य में टंकारा नाम का एक छोटा सा नगर है। यहाँ आज से लगभग एक शताब्दी पूर्व एक ब्राह्मण परिवार रहता था। इस परिवार के मुखिया कर्षण जी थे। यह परिवार धन धान्य से संपन्न था। कर्षण जी शिव भक्त थे। उनके घर फाल्गुन कृष्ण दशमी संवत १८८१ विक्रमी (सन १८२४) में एक बालक ने जन्म लिया, जिसका नाम मूलशंकर रखा गया। किसी को क्या पता था की यह बालक संसार को जीवन ज्योति प्रदान करेगा। पाखण्डो में फंसे हुए लोगो को ज्ञान का प्रकाश देकर सन्मार्ग पर चलाएगा। पिता पौराणिक परिपाटी के शिवभक्त थे, अतः वे पुत्र को भी अपने जैसा ही शिव भक्त बनाना चाहते थे। बालक मूलशंकर की बुद्धि तीव्र थी, अतः उसने बाल्यावस्था में ही पुराणों की अने...

Valentine day and .........?

Image
वेलेंटाइन और हम भारतीय।  वैलेंटाइन डे आप कैसे मनांते हैं? क्या है इसमें, ये किसकी परम्परा है ? ये कहाँ से खड़ा हुवा था ? इटली में पैदा हुवा एक साधारण इंसान। कट्टर ईसाई।  वैलेंटाइन उन्होंने एक लड़की के साथ शादी की थी। वहां के राजा को ये नागवार गुजर था। वे उन्हें ईसायियत से और इस तरह के प्रेम आचरण जो की आने वाली पीढ़ी को गलत सन्देश देने वाली थी, से बहार करना चाहते थे। तात्कालिक परिस्थितियों में राजा गलत नहीं थे। 14 फरवरी को उनकी मौत हुयी और वहां का एक समुदाय विशेष इसे एक उत्सव के रूप में मनाने लगा।  धीरे धीरे समय ने करवट ली। जो समुदाय विशेष इसे शुरू में मनाने लगा था, वो वहां का शक्तिशाली समुदाय था। इसे एक त्यौहार के रूप में मनाने लगा। देखा देखी वहां का निम्न वर्ग शक्तिशाली समुदाय के निकट आने की जुगत में उनका अनुसरण करने लगा। शक्तिशाली समुदाय ने उन्हें स्व संत घोषित कर दिया। तदुपरांत यूरोप भयंकर सक्रमण काल से गुजरा और लोग भूल गए।  परम्परा चलती रही। संत की उपाधि लग चुकी थी। यूरोपीय लोग अपनी परम्पराओ से बहूत प्यार करते है। हम भारतीय उनकी नक़ल करते है। ओधोगिक विकास...

शेखवाटी में शादी कैसे होती है ?

Image
शेखावाटी, शादी और डांस। भारत के विभिन्न प्रान्तों में विवाह की अलग अलग रश्मे है। हर प्रान्त में विवाह के लिए कुछ रश्मों व रीति -रिवाजों को अपनाया गया है। हर जगह के रीति रिवाज अपने आप में खास है। भारत में विवाह एक खास अवसर है। आज हम यहाँ शेखावाटी में विवाह की कुछ रश्मों के बारे में जानते है। 1 . सगाई शेखावाटी में विवाह से पहले लड़का और लड़की के परिवार आपस में मिलकर सगाई की रस्म पूरी करते हैं , जो लगभग पूरे भारत में एक समान ही है।  यानि हर प्रान्त में सगाई की रस्म होती है।  लेकिन शेखावाटी में ये परिवार के ही सदस्य आपस में एक दूसरे को बताते हैं , की फलां गांव में लड़की है, या लड़का है।  फिर लड़के या लड़की के घर वाले अपने कुछ निकट सम्बन्धियों को लेकर उस गांव में जाते है।  पहले लड़की वाले लड़के के घर जाते थे।  आजकल लिंगानुपात में गिरावट होने की वजह से लड़के वाले लड़की के घर जाते है। लड़की को देखने से पहले ही उसके बारे में पड़ताल कर ली जाती है।  उसके घर जाने का मकसद ये होता है की लड़की वाले राजी हो जाएँ और हमारे लड़के को देखने आ जाएँ। फिर लड़की वाले लड़के के घर व...

शेखावाटी - मंडावा

Image
शेखावाटी मंडावा  शेखावाटी मंडावा  में भर्मण के लिए आज अपन मंडावा की सैर करेंगे। मंडावा पहुँचने के लिए आप को जयपुर से लगभग 200 किमी का सफर करना पड़ेगा।  अगर आप देहली की तरफ से आते है तो, आप को लगभग 275 -280 किमी का सफर करना पड़ेगा। मंडावा शेखावाटी के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है।  विदेश से आने वाले पर्यटको के मानचित्र में जयपुर के बाद दूसरे स्थान पर आता है। मंडावा शेखावाटी के लगभग मध्य में स्थित है।  यहाँ की आबो हवा उष्ण कटिबंधीय होने के कारन फरवरी मार्च का महीना भर्मण के लिए बहूत ही उत्तम है। मंडावा आने वाले पर्यटक मंडावा , नवलगढ़ , फतेहपुर , इन तीन स्थानों को अपनी लिस्ट में प्रमुखता से रखते है। क्या क्या देखें। 1. मंडावा फोर्ट 18 वीं. शताब्दी का मंडावा का किला जो वहां के शासक ठा. नवल सिंह ने बनवाया था।  ठा. नवल सिंह मंडावा के आलावा नवलगढ़ ठिकाने के भी राजा थे। किला बहूत ही सूंदर नक्कासी, गुम्बद, मीनारो के साथ बना हुवा है. आज भी अपने उसी स्वरूप में है। मंडावा किले का आंतरिक भाग   2. मंडावा का चार बुर्ज कुआँ ये कुआं जिसके चार बड़ी...

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें

Image
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें।  आज के दिन से प्रकृति अपना सौन्दर्य निखारने लगती है जो लगभग तीन महीने तक चरम पर रहेगा।  उसके बाद गर्मियों की ऋतु में धीरे धीरे इसके सौन्दर्य में थोड़ी कमी आती है, जो वर्षा ऋतु में पुनः लौट आती है। स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक रूप से ये 2 -3 महीने स्वास्थ्य के लिए बहूत महत्वपूर्ण होते है।  जिस तरह से प्रकृति में बदलाव आता है, वैसे हम अपने स्वस्थ्य में भी बदलाव ला सकते है। जैसे पेड़ों पर नयी कोंपल, फूल पत्तियां आती है, वैसे ही हमारे शरीर में भी रक्त का बदलाव होता है। अगर इस समय को हम थोड़ी सी सावधानी के साथ औषधीय र्रोप से लें तो प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहेंगें। मानसिक रूप से तनाव मुक्त रहने के लिए उत्तम समय है। ग्रंथों में वसंत के मौसम को सारी ऋतुओं का राजा इसीलिए कहा है। प्रकृति का जादू  जब हम जंगल, समंदर, नदी किनारे या पहाड़ पर फूलों को देखते हैं, तो मन को एक तरह का सुकून मिलता है।  प्रकृति की यह विविधता देखकर हम आश्चर्य से भर जाते है।  कितने ही दुखी हों, घने जंगल, कुदरती ...

शेखावाटी-नवलगढ़

Image
शेखावाटी की झलक   नवलगढ़।   नवलगढ़ क़स्बा आज के बावड़ी गेट , नानसा गेट, अगुणा दरवाजा, मण्डी गेट इन चार दरवाजो के मध्य बसा हुवा था।  18 वी सदी में ठाकुर नवल सिंह ने इस कस्बे की स्थापना की थी। जो आज राजस्थान के शेखावाटी में स्थित है। नवल सिंह शेखावाटी के नवलगढ़ और मंडावा प्रांत के शासक थे। 1836 में बनी नवलगढ़ की हवेलियों पर चित्रकारी बहुत ही कुशलता पूर्वक की गई है। इसके अलावा 1920 में बनी पोद्दारो की हवेली और बाला किला, (जिसे स्थानीय लोग कचिया गढ़ भी कहते है, क्योंकि इस पर चारो तरफ कांच जड़ा हुवा था।) जिसकी दीवारों पर लोक कहानियां चित्रित है, सैलानियों को अपनी और आकर्षित करती है। इसके अतिरिक्त जोधराज पाटोदिया हवेली, बंसीधर भगत हवेली, सेकसरिया हवेली, जैपुरिया हवेली, चोखानी हवेली, रूप निवास महल, गंगा मैया मंदिर, और ब्रिटिश क्लॉक टावर नवलगढ़ के अन्य आकर्षण है। नवलगढ़ के शासक की एक कहानी  राजस्थान के शेखावाटी अंचल के ठिकाने नवलगढ़, (झुंझनु जिले में) के शासक ठाकुर नवल सिंह शेखावत अपने खिराज मामले के साठ हजार रुपयों की बकाया पेटे बाईस हजार रूपये की हुण्डी लेकर दि...

68 वें गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें !

Image
68 वें गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें ! दोस्तों आज हम 68 वां गणतंत्र दिवस मना   रहे हैं।   एक तरह से देखा जाये तो हमारा गणतंत्र वृद्धावस्था की और बढ़ रहा है। अगर पीछे मुड़कर देखें   तो ? क्या पाया?   ये एक ज्वलंत प्रश्न खड़ा दिखता है। अपने समाज में , सोसायटी में जो असन्तुलन की खाई है , वो बढती जा रही है।   तमाम कोशिशों के बावजूद हम आज भी देश से गरीबी को नहीं मिटा पाएं है। गरीबी तो दूर की बात है , हम मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं जूता पाएं है। गरीबी भारत में चारों तरफ फैली हुई   है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से , गरीबी का प्रसार चिंता का विषय है। ये 21 वीं शताब्दी है , और गरीबी आज भी लगातार बढ़ रही गंभीर खतरा है। 1.30  बिलियन जनसंख्या में से 29.7% से भी अधिक जनसंख्या आज भी गरीबी रेखा से नीचे है। ये ध्यान देने वाली बात है कि पिछले दशकों में गरीबी के स्तर में गिरावट हुई है लेकिन अमीरों और गरीबों के बीच की ...