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किसानों के लिए एक मोटर में दो मशीन चलाने का जुगाड़

किसान बचत कैसे करें  भारत में किसान के लिए बचत ही उसका मुनाफा है। क्योंकि बाजार उसके अनुकूल नहीं है। जो भी किसान फसल उगाता है, वो पशुपालन भी करता है। इस प्रकार किसान पशुपालन के द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित करता है। ये अतिरिक्त आय ही उसकी बचत होती है। किसान अपने छोटे छोटे खोजी तरीकों से बचत के तरिके ढूंढता रहता है। आज हम यहाँ ऐसे ही एक तरीके की बात कर रहे है। जी हाँ किसान की बचत का एक तरीका जिसे अपनाकर किसान अपनी बचत व श्रम का बेहतर तरीके से उपयोग का सकता है। हम बात करेंगे चारा काटने वाली मशीन की। हर किसान पशुपालन करता है। पशुओं की देखरेख में उसका बहुत सा समय जाया होता है। अगर ऐसे तरीके अपनाकर वह कार्य करे तो उसके धन व समय की बचत होगी। आज हम इस वीडियो में हरा चारा काटने वाली मशीन के प्रयोग की बात करेंगे।  एक मोटर से दो मशीन कैसे चलाएं  जैसा की वीडियो में दिखाया गया है, सबसे पहले आप बाजार से 5 X 3 फ़ीट के दो पत्थर लेकर आएं। फिर चारा काटने वाली मशीन के पैरों के नाप से उस पर चार छेद करके नट व बोल्ट की सहायता से मशीन को अच्छे से उस पत्थर पर फिक्स कर लें। ...

Valentine day and .........?

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वेलेंटाइन और हम भारतीय।  वैलेंटाइन डे आप कैसे मनांते हैं? क्या है इसमें, ये किसकी परम्परा है ? ये कहाँ से खड़ा हुवा था ? इटली में पैदा हुवा एक साधारण इंसान। कट्टर ईसाई।  वैलेंटाइन उन्होंने एक लड़की के साथ शादी की थी। वहां के राजा को ये नागवार गुजर था। वे उन्हें ईसायियत से और इस तरह के प्रेम आचरण जो की आने वाली पीढ़ी को गलत सन्देश देने वाली थी, से बहार करना चाहते थे। तात्कालिक परिस्थितियों में राजा गलत नहीं थे। 14 फरवरी को उनकी मौत हुयी और वहां का एक समुदाय विशेष इसे एक उत्सव के रूप में मनाने लगा।  धीरे धीरे समय ने करवट ली। जो समुदाय विशेष इसे शुरू में मनाने लगा था, वो वहां का शक्तिशाली समुदाय था। इसे एक त्यौहार के रूप में मनाने लगा। देखा देखी वहां का निम्न वर्ग शक्तिशाली समुदाय के निकट आने की जुगत में उनका अनुसरण करने लगा। शक्तिशाली समुदाय ने उन्हें स्व संत घोषित कर दिया। तदुपरांत यूरोप भयंकर सक्रमण काल से गुजरा और लोग भूल गए।  परम्परा चलती रही। संत की उपाधि लग चुकी थी। यूरोपीय लोग अपनी परम्पराओ से बहूत प्यार करते है। हम भारतीय उनकी नक़ल करते है। ओधोगिक विकास...

Rani Padmavati and Bhansali

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अभिवक्ति की स्वतंत्रता वही तक सिमित है जहाँ पर दूसरे की स्वतंत्रता शुरू हो जाती है।  रानी पद्मिनी को लेकर जो बवाल मचा है, उस के संदर्भ में यह लेख उद्रित है। अपने बहूत सारे लाभ के लिए फ़िल्मकार ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़खानी करते आये है। इसके पीछे बनने वाली फिल्म का प्री प्रचार है। रानी पद्मिनी के साथ समुदाय विशेष के साथ ऐतिहासिकता भी जुडी हुई है। कैसे तथ्यों को तोड़ कर कोई किसी की भावनाओ के साथ खिलवाड़ कर सकता है? अगर किसी फिल्म के प्रोड्यूसर, हीरो, या किसी भी तरह के व्यक्ति जो उस फिल्म से जुड़ा हुवा है, को इस तरह की अप्रिय घटना का सामना करना पड़ता है, तो इसके लिए वह स्वयं दोषी है। फिल्म से जुड़े हुए लोगो को रानी व उस समय के इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। अपने लाभ के लिए इतिहास के साथ छेड छाड़ नहीं करनी चाहिए। अपनी रचना से समाज को सन्देश दे रहे है, तो समाज के हर वर्ग व भावी पीढ़ी का ख्याल रखना चाहिए। रानी पद्मिनी की कहानी को पहले ही बहूत तोड़ मरोड़ कर, काल्पनिक रूप से लिखा गया है। लेकिन फ़िल्मकार जो बताना चाह रहा है, वह तो मुस्लिम इतिहासकारों ने भी नहीं लिखा। रानी पद्म...

शेखावाटी-नवलगढ़

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शेखावाटी की झलक   नवलगढ़।   नवलगढ़ क़स्बा आज के बावड़ी गेट , नानसा गेट, अगुणा दरवाजा, मण्डी गेट इन चार दरवाजो के मध्य बसा हुवा था।  18 वी सदी में ठाकुर नवल सिंह ने इस कस्बे की स्थापना की थी। जो आज राजस्थान के शेखावाटी में स्थित है। नवल सिंह शेखावाटी के नवलगढ़ और मंडावा प्रांत के शासक थे। 1836 में बनी नवलगढ़ की हवेलियों पर चित्रकारी बहुत ही कुशलता पूर्वक की गई है। इसके अलावा 1920 में बनी पोद्दारो की हवेली और बाला किला, (जिसे स्थानीय लोग कचिया गढ़ भी कहते है, क्योंकि इस पर चारो तरफ कांच जड़ा हुवा था।) जिसकी दीवारों पर लोक कहानियां चित्रित है, सैलानियों को अपनी और आकर्षित करती है। इसके अतिरिक्त जोधराज पाटोदिया हवेली, बंसीधर भगत हवेली, सेकसरिया हवेली, जैपुरिया हवेली, चोखानी हवेली, रूप निवास महल, गंगा मैया मंदिर, और ब्रिटिश क्लॉक टावर नवलगढ़ के अन्य आकर्षण है। नवलगढ़ के शासक की एक कहानी  राजस्थान के शेखावाटी अंचल के ठिकाने नवलगढ़, (झुंझनु जिले में) के शासक ठाकुर नवल सिंह शेखावत अपने खिराज मामले के साठ हजार रुपयों की बकाया पेटे बाईस हजार रूपये की हुण्डी लेकर दि...