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किसानों के लिए एक मोटर में दो मशीन चलाने का जुगाड़

किसान बचत कैसे करें  भारत में किसान के लिए बचत ही उसका मुनाफा है। क्योंकि बाजार उसके अनुकूल नहीं है। जो भी किसान फसल उगाता है, वो पशुपालन भी करता है। इस प्रकार किसान पशुपालन के द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित करता है। ये अतिरिक्त आय ही उसकी बचत होती है। किसान अपने छोटे छोटे खोजी तरीकों से बचत के तरिके ढूंढता रहता है। आज हम यहाँ ऐसे ही एक तरीके की बात कर रहे है। जी हाँ किसान की बचत का एक तरीका जिसे अपनाकर किसान अपनी बचत व श्रम का बेहतर तरीके से उपयोग का सकता है। हम बात करेंगे चारा काटने वाली मशीन की। हर किसान पशुपालन करता है। पशुओं की देखरेख में उसका बहुत सा समय जाया होता है। अगर ऐसे तरीके अपनाकर वह कार्य करे तो उसके धन व समय की बचत होगी। आज हम इस वीडियो में हरा चारा काटने वाली मशीन के प्रयोग की बात करेंगे।  एक मोटर से दो मशीन कैसे चलाएं  जैसा की वीडियो में दिखाया गया है, सबसे पहले आप बाजार से 5 X 3 फ़ीट के दो पत्थर लेकर आएं। फिर चारा काटने वाली मशीन के पैरों के नाप से उस पर चार छेद करके नट व बोल्ट की सहायता से मशीन को अच्छे से उस पत्थर पर फिक्स कर लें। ...

काचरा और गुवार फली का आचार

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काचरा गुवार फली    काचरा और गुवार फली का आचार बहुत ही स्वादिस्ट होता है।  सबसे पहले खेत में से पके हुये काचरे इक्कठे कर लेने चाहिए। उनको धोकर छाँव में सुखा देना चाहिए, दो दिन बाद इनको 4-5 टुकड़ो में काटकर (लम्बाई के आकार में) साफ कपड़े पर हल्का नमक डालकर सुखाना चाहिए। जब नमक एक दो दिन में इन के अंदर सोख लिया जाये तो हल्के हल्के बीज अलग कर दिजीए। अब मसाला तैयार करके कडाही में तैल गर्म होने के लिए चढा देना चाहिए। जब तैल गर्म हो जाये तो मसाले का छौंक लगाा दिजिए। फिर इसे आधा घन्टे तक गर्म किजिए। अब कटे हुये काचरे के टुकड़ो को इस में मिला लिजिए। 5-7 मिनट के बीद किसी साफ बर्तन में निकाल लिजिये। जब ये ठंडा हो जाये तो इसमें थोड़ा तैल और गर्म करके उपर तक ढक दिजिए। अब इसे किसी ठंडे छायादार स्थान में रख दें। 10-15 दिन के बाद जब काचरे के टुकड़े मुलायम हो जाये तो खाने में प्रयोग करें। ध्यान रहे जब बर्तन में से तैयार आचार को निकाले तो साफ हाथो से निकालें, आटे से सने हाथों का प्रयोग न करें । खाने के लिए निकालने के बाद सुनिश्चित करें कि तैल उपर तक हो।  इस प्रकार आप...

क्या यही जीवन की सच्चाई है। Think about it !!!

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सोचो साथ क्या जायेगा।  *एक बेहतरीन मैसेज....* क्या यही जीवन की सच्चाई है।  क्या हम *बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स, केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ???* *हम बड़े बड़े क़ीमती मकानों और बेहद खर्चीली शादियों से* किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ??? क्या आपको याद है कि, *दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने क्या खाया था ???* जीवन के प्रारंभिक वर्षों में *क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ???* कितनी पीढ़ियों के *खान पान और लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ???* हम में से *अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है।* हमारी जरूरत कितनी हैं और *हम पाना कितना चाहते हैं ???* *इस बारे में सोचिए।* क्या हमारी *अगली पीढ़ी कमाने में सक्षम नहीं है जो, हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा सेविंग कर देना चाहते हैं !?!* क्या हम *सप्ताह में डेढ़ दिन अपने मित्रों, अपने परिवार और अपने लिए स्पेयर नहीं कर सकते ???* क्या आप *अपनी मासिक आय का 5 % अपने आनंद के लिए, अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ???* *सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता ह...

Accidental Death & Compensation: (Income Tax Return Required)

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Section 166 of the Motor act 1988 (Supreme Court Judgment under Civil Appeal No. 9858 of 2013 Car Accident Arising out of SLP (C) No. 1056 of 2008) Dt 31 Oct 2013. Accidental Death & Compensation: (Income Tax Return Required) अगर किसी व्यक्ति की accidental death होती है और वह व्यक्ति पिछले तीन साल से लगातार इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल कर रहा था तो उसकी पिछले तीन साल की एवरेज सालाना इनकम की दस गुना राशि उस व्यक्ति के परिवार को देने के लिए सरकार बाध्य है । जी हाँ , आपको आश्चर्य हो रहा होगा यह सुनकर लेकिन यह बिलकुल सही सरकारी नियम है , उदहारण के तौर पर अगर किसी की सालाना आय क्रमशः पहले दूसरे और तीसरे साल चार लाख पांच लाख और छः लाख है तो उसकी औसत आय पांच लाख का दस गुना मतलब पचास लाख रूपए उस व्यक्ति के परिवार को सरकार से मिलने का हक़ है। ज़्यादातर जानकारी के अभाव में लोग यह क्लेम सरकार से नहीं लेते हैं । जाने वाले की कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता है लेकिन अगर पैसा पास में हो तो भविष्य सुचारू रूप से चल सकता है । अगर लगातार तीन साल तक रिटर्न दाखिल नहीं कि...

#1 Excel 2017 I page setup I I Page setup in Excel 2017 I

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पेज सेट अप इन एक्सेल  कंप्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल आप के ऑफिस/बिज़नस/स्माल/शॉप वर्क को आसान बनांने के लिए बेहतरीन एप्लीकेशन है। आइये आज अपन इस एप्लीकेशन में पेज सेटअप कैसे करते है, जानते है। सबसे पहले आप ने जो काम एक्सेल में किया है उस फाइल को ओपन कर लें।  उसके बाद फाइल मेनू में जाये और प्रिंट के ऑप्शन पर माउस को लेकर जाएँ । अब आपके सामने तीन ऑप्शन होंगे जहाँ पर आप को प्रिंट preview के ऑप्शन पर क्लिक करना है।  क्लिक करते ही कंप्यूटर आप को आप की फाइल जिस में आप ने काम किया है उसका preview दिखायेगा की आप का पेज प्रिंट होने के बाद ऐसा आएगा। यहाँ पर आप को प्रिंट, पेज सेट अप, ज़ूम, नेक्स्ट पेज, शो मार्जिन, व क्लोज प्रिंट preview दिखायेगा।  आप को पेज सेट अप पर क्लिक करना है। अब आप को नेक्स्ट ऑप्शन पेज सेट अप का दिखायेगा जिसमे आप को चार ऑप्शन मिलेंगे   1. Page 2.Margin 3. Header/Footer and 4. Sheet आप को पेज में कई ऑप्शन मिलेंगे जहाँ पर आप अपने पेज को पोर्ट्रेट लेना कहते है तो इसे टिक कर दे। अगर आप को लैंडस्केप प्रिंट चाहिए तो आप इसे टिक कर दे।...

Excel Chart Progress between Pak Vs India. How to Insert a chart.

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आज तक अपन ने क्रिकेट मैच में जो ग्राफ दिखाए जाते है वो टीवी पर ही देखा है।  ये ग्राफ बनते कैसे है, ये जानने, सीखने के लिए आप वीडियो देखें। देखें कैसे ग्राफ बनता है , जैसे जैसे रन बनते है, वैसे वैसे ग्राफ जो टीवी पर दिखाया जाता है।  

पृथ्वी का अमृत-तिल का तेल सर्वोत्तम खाद्य पदार्थ

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*पृथ्वी का अमृत.. सफ़ेद तिल  कला तिल  तिल का तेल...* ( 5 मिनिट का समय निकाल कर पोस्ट को जरूर पढ़े ) यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है, और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं, क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है।  तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे।  तिल के तेल में इतनी ताकत होती है, कि यह पत्थर को भी चीर देता है। प्रयोग करके देखें.... आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा का का वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... लेकिन... अब आप उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर...

National Portal of India - सभी सेवाएं एक ही जगह।

सभी सेवाएं एक ही जगह।   https://services.india.gov.in भारत सरकार ने लगभग 2000 सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध करवाई है।  लेकिन हम जानकारी के अभाव में आज भी इधर उधर भटकते रहते है। कुछ जरुरी सेवाओं की सूचि यहाँ उपलब्ध है। 1. Apply for jobs on National Career Service Portal           https://www.ncs.gov.in/Pages/default.aspx ऊपर दिए गए लिंक पर आप भारत सरकार व केन्द्र सरकार के उपक्रमों में निकलने वाली विभिन्न नियुक्तियों के न लाइन फार्म भर सकते है।  2.  Apply online for new PAN card or corrections in PAN card https://www.onlineservices.nsdl.com/paam/endUserRegisterContact.html ऊपर दिए गए लिंक पर आप ऑनलाइन पैन कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते है। अपने पुराने पैन कार्ड की जानकारी बदलने के लिए या उपडेट करने की लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते है।    3. Apply & search student scholarships online  https://www.vidyalakshmi.co.in/Students ऊपर दिए गए लिंक पर जाकर आप अपने बच्चों को विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली ...

ईश्वर कहाँ है ?

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ईश्वर कहाँ है ?  भोलेनाथ , शिव , शिवम् , महादेव, महेश माता-पिता और आचार्य ये तीनों गुरु कहलाते हैं। माता पहला गुरु है। बच्चे को पहली शिक्षा माता से ही मिलती है माता बच्चे को व्यावहारिक शिक्षा देती है। उसे अपने शरीर के अंगों का, सगे सम्बन्धियों का, बच्चे के संपर्क में आने वाले पशु पक्षियों का ज्ञान कराती है। उसे उठना बैठना, हँसना, बोलना, दूसरों का आदर करना व स्नेह करना सिखाती है। माता पुत्र को जो शिक्षा देती है, उसमें पिता भी सहयोग करते हैं। जब बच्चा बड़ा होता है तो उसकी जिज्ञासाएं भी बढ़ने लगती है। इन जिज्ञासाओं को उन्नत और प्रोत्साहित करने की मुख्य जिम्मेदारी पिता की होती है, माता सहयोग करती है। आचार्य का शिक्षा सम्बंधित उत्तरदायित्व उपनयन संस्कार के साथ या यों कहे कि विद्यालय में प्रवेश के साथ आरम्भ होता है। पुराने समय में बड़ो के प्रति शालीनता के तथा ईश्वर भक्ति के संस्कार बचपन में ही डाल दिए जाते थे। ईश्वर कैसा है? कहाँ रहता है? क्या करता है? आदि बातें बच्चा पिता से ही सीख लेता है। उन दिनों आजीविका की समस्या इतनी विकट नहीं थी।  पिता को इतना समय आसा...

Valentine day and .........?

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वेलेंटाइन और हम भारतीय।  वैलेंटाइन डे आप कैसे मनांते हैं? क्या है इसमें, ये किसकी परम्परा है ? ये कहाँ से खड़ा हुवा था ? इटली में पैदा हुवा एक साधारण इंसान। कट्टर ईसाई।  वैलेंटाइन उन्होंने एक लड़की के साथ शादी की थी। वहां के राजा को ये नागवार गुजर था। वे उन्हें ईसायियत से और इस तरह के प्रेम आचरण जो की आने वाली पीढ़ी को गलत सन्देश देने वाली थी, से बहार करना चाहते थे। तात्कालिक परिस्थितियों में राजा गलत नहीं थे। 14 फरवरी को उनकी मौत हुयी और वहां का एक समुदाय विशेष इसे एक उत्सव के रूप में मनाने लगा।  धीरे धीरे समय ने करवट ली। जो समुदाय विशेष इसे शुरू में मनाने लगा था, वो वहां का शक्तिशाली समुदाय था। इसे एक त्यौहार के रूप में मनाने लगा। देखा देखी वहां का निम्न वर्ग शक्तिशाली समुदाय के निकट आने की जुगत में उनका अनुसरण करने लगा। शक्तिशाली समुदाय ने उन्हें स्व संत घोषित कर दिया। तदुपरांत यूरोप भयंकर सक्रमण काल से गुजरा और लोग भूल गए।  परम्परा चलती रही। संत की उपाधि लग चुकी थी। यूरोपीय लोग अपनी परम्पराओ से बहूत प्यार करते है। हम भारतीय उनकी नक़ल करते है। ओधोगिक विकास...

शेखवाटी में शादी कैसे होती है ?

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शेखावाटी, शादी और डांस। भारत के विभिन्न प्रान्तों में विवाह की अलग अलग रश्मे है। हर प्रान्त में विवाह के लिए कुछ रश्मों व रीति -रिवाजों को अपनाया गया है। हर जगह के रीति रिवाज अपने आप में खास है। भारत में विवाह एक खास अवसर है। आज हम यहाँ शेखावाटी में विवाह की कुछ रश्मों के बारे में जानते है। 1 . सगाई शेखावाटी में विवाह से पहले लड़का और लड़की के परिवार आपस में मिलकर सगाई की रस्म पूरी करते हैं , जो लगभग पूरे भारत में एक समान ही है।  यानि हर प्रान्त में सगाई की रस्म होती है।  लेकिन शेखावाटी में ये परिवार के ही सदस्य आपस में एक दूसरे को बताते हैं , की फलां गांव में लड़की है, या लड़का है।  फिर लड़के या लड़की के घर वाले अपने कुछ निकट सम्बन्धियों को लेकर उस गांव में जाते है।  पहले लड़की वाले लड़के के घर जाते थे।  आजकल लिंगानुपात में गिरावट होने की वजह से लड़के वाले लड़की के घर जाते है। लड़की को देखने से पहले ही उसके बारे में पड़ताल कर ली जाती है।  उसके घर जाने का मकसद ये होता है की लड़की वाले राजी हो जाएँ और हमारे लड़के को देखने आ जाएँ। फिर लड़की वाले लड़के के घर व...

शेखावाटी - मंडावा

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शेखावाटी मंडावा  शेखावाटी मंडावा  में भर्मण के लिए आज अपन मंडावा की सैर करेंगे। मंडावा पहुँचने के लिए आप को जयपुर से लगभग 200 किमी का सफर करना पड़ेगा।  अगर आप देहली की तरफ से आते है तो, आप को लगभग 275 -280 किमी का सफर करना पड़ेगा। मंडावा शेखावाटी के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है।  विदेश से आने वाले पर्यटको के मानचित्र में जयपुर के बाद दूसरे स्थान पर आता है। मंडावा शेखावाटी के लगभग मध्य में स्थित है।  यहाँ की आबो हवा उष्ण कटिबंधीय होने के कारन फरवरी मार्च का महीना भर्मण के लिए बहूत ही उत्तम है। मंडावा आने वाले पर्यटक मंडावा , नवलगढ़ , फतेहपुर , इन तीन स्थानों को अपनी लिस्ट में प्रमुखता से रखते है। क्या क्या देखें। 1. मंडावा फोर्ट 18 वीं. शताब्दी का मंडावा का किला जो वहां के शासक ठा. नवल सिंह ने बनवाया था।  ठा. नवल सिंह मंडावा के आलावा नवलगढ़ ठिकाने के भी राजा थे। किला बहूत ही सूंदर नक्कासी, गुम्बद, मीनारो के साथ बना हुवा है. आज भी अपने उसी स्वरूप में है। मंडावा किले का आंतरिक भाग   2. मंडावा का चार बुर्ज कुआँ ये कुआं जिसके चार बड़ी...

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें

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बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें।  आज के दिन से प्रकृति अपना सौन्दर्य निखारने लगती है जो लगभग तीन महीने तक चरम पर रहेगा।  उसके बाद गर्मियों की ऋतु में धीरे धीरे इसके सौन्दर्य में थोड़ी कमी आती है, जो वर्षा ऋतु में पुनः लौट आती है। स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक रूप से ये 2 -3 महीने स्वास्थ्य के लिए बहूत महत्वपूर्ण होते है।  जिस तरह से प्रकृति में बदलाव आता है, वैसे हम अपने स्वस्थ्य में भी बदलाव ला सकते है। जैसे पेड़ों पर नयी कोंपल, फूल पत्तियां आती है, वैसे ही हमारे शरीर में भी रक्त का बदलाव होता है। अगर इस समय को हम थोड़ी सी सावधानी के साथ औषधीय र्रोप से लें तो प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहेंगें। मानसिक रूप से तनाव मुक्त रहने के लिए उत्तम समय है। ग्रंथों में वसंत के मौसम को सारी ऋतुओं का राजा इसीलिए कहा है। प्रकृति का जादू  जब हम जंगल, समंदर, नदी किनारे या पहाड़ पर फूलों को देखते हैं, तो मन को एक तरह का सुकून मिलता है।  प्रकृति की यह विविधता देखकर हम आश्चर्य से भर जाते है।  कितने ही दुखी हों, घने जंगल, कुदरती ...

Rani Padmavati and Bhansali

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अभिवक्ति की स्वतंत्रता वही तक सिमित है जहाँ पर दूसरे की स्वतंत्रता शुरू हो जाती है।  रानी पद्मिनी को लेकर जो बवाल मचा है, उस के संदर्भ में यह लेख उद्रित है। अपने बहूत सारे लाभ के लिए फ़िल्मकार ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़खानी करते आये है। इसके पीछे बनने वाली फिल्म का प्री प्रचार है। रानी पद्मिनी के साथ समुदाय विशेष के साथ ऐतिहासिकता भी जुडी हुई है। कैसे तथ्यों को तोड़ कर कोई किसी की भावनाओ के साथ खिलवाड़ कर सकता है? अगर किसी फिल्म के प्रोड्यूसर, हीरो, या किसी भी तरह के व्यक्ति जो उस फिल्म से जुड़ा हुवा है, को इस तरह की अप्रिय घटना का सामना करना पड़ता है, तो इसके लिए वह स्वयं दोषी है। फिल्म से जुड़े हुए लोगो को रानी व उस समय के इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। अपने लाभ के लिए इतिहास के साथ छेड छाड़ नहीं करनी चाहिए। अपनी रचना से समाज को सन्देश दे रहे है, तो समाज के हर वर्ग व भावी पीढ़ी का ख्याल रखना चाहिए। रानी पद्मिनी की कहानी को पहले ही बहूत तोड़ मरोड़ कर, काल्पनिक रूप से लिखा गया है। लेकिन फ़िल्मकार जो बताना चाह रहा है, वह तो मुस्लिम इतिहासकारों ने भी नहीं लिखा। रानी पद्म...

शेखावाटी-नवलगढ़

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शेखावाटी की झलक   नवलगढ़।   नवलगढ़ क़स्बा आज के बावड़ी गेट , नानसा गेट, अगुणा दरवाजा, मण्डी गेट इन चार दरवाजो के मध्य बसा हुवा था।  18 वी सदी में ठाकुर नवल सिंह ने इस कस्बे की स्थापना की थी। जो आज राजस्थान के शेखावाटी में स्थित है। नवल सिंह शेखावाटी के नवलगढ़ और मंडावा प्रांत के शासक थे। 1836 में बनी नवलगढ़ की हवेलियों पर चित्रकारी बहुत ही कुशलता पूर्वक की गई है। इसके अलावा 1920 में बनी पोद्दारो की हवेली और बाला किला, (जिसे स्थानीय लोग कचिया गढ़ भी कहते है, क्योंकि इस पर चारो तरफ कांच जड़ा हुवा था।) जिसकी दीवारों पर लोक कहानियां चित्रित है, सैलानियों को अपनी और आकर्षित करती है। इसके अतिरिक्त जोधराज पाटोदिया हवेली, बंसीधर भगत हवेली, सेकसरिया हवेली, जैपुरिया हवेली, चोखानी हवेली, रूप निवास महल, गंगा मैया मंदिर, और ब्रिटिश क्लॉक टावर नवलगढ़ के अन्य आकर्षण है। नवलगढ़ के शासक की एक कहानी  राजस्थान के शेखावाटी अंचल के ठिकाने नवलगढ़, (झुंझनु जिले में) के शासक ठाकुर नवल सिंह शेखावत अपने खिराज मामले के साठ हजार रुपयों की बकाया पेटे बाईस हजार रूपये की हुण्डी लेकर दि...

68 वें गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें !

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68 वें गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें ! दोस्तों आज हम 68 वां गणतंत्र दिवस मना   रहे हैं।   एक तरह से देखा जाये तो हमारा गणतंत्र वृद्धावस्था की और बढ़ रहा है। अगर पीछे मुड़कर देखें   तो ? क्या पाया?   ये एक ज्वलंत प्रश्न खड़ा दिखता है। अपने समाज में , सोसायटी में जो असन्तुलन की खाई है , वो बढती जा रही है।   तमाम कोशिशों के बावजूद हम आज भी देश से गरीबी को नहीं मिटा पाएं है। गरीबी तो दूर की बात है , हम मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं जूता पाएं है। गरीबी भारत में चारों तरफ फैली हुई   है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से , गरीबी का प्रसार चिंता का विषय है। ये 21 वीं शताब्दी है , और गरीबी आज भी लगातार बढ़ रही गंभीर खतरा है। 1.30  बिलियन जनसंख्या में से 29.7% से भी अधिक जनसंख्या आज भी गरीबी रेखा से नीचे है। ये ध्यान देने वाली बात है कि पिछले दशकों में गरीबी के स्तर में गिरावट हुई है लेकिन अमीरों और गरीबों के बीच की ...