Saturday, 31 December 2016

देखो वीर जवानों....!

देखो वीर जवानों....!
कर चले हम फ़िदा जानो तन साथियों.........!
आज हम साल के आखरी समय में खुशियां मना रहे हैं। हम में से कोई भी उन परिवारों को याद नहीं कर रहा, जिन परिवारों के लाडलों ने अपनी जान पर खेल कर इस देश की रक्षा की और अपनी जान की बाजी लगा कर चले गए। क्या उस माँ को याद नहीं है उस का बेटा , उस पिता की बूढी आँखे अपने बेटे की हम उमर नोजवानो को ताकती है, कि भूल से भी एक झलक अपने बेटे की सी दिख जाये। उस वीरांगना के मन में क्या है ? कोई नहीं जानता। वो बच्चे इन छुटियों में इंतजार कर रहे हैं,  पतंग और दूसरी खेलने की चीजों का।  लेकिन नहीं है , कोई नहीं है जो इस बार उनको ये सब दिला के लाएगा। क्या विडम्बना है एक सुहागन के  जीवन की उसने आखिरी समय में जी भर के देखा भी नहीं, और विधवा हो कर जीवन भर का दुःख ले लिया। कांपती भरभराती आवाज से बूढा पिता अपने बेटे के बच्चों को सम्हाल रहा है ताकि, बचे हुए जीवन में  इस परिवार के लिए कुछ कर सके। किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, इन शहीदों के परिवारों को ये सिर्फ इन परिवारों के नजदीक रहने वाला ही जान सकता है।  ये चित्र एक शहीद के अंतिम संस्कार के अंतिम समय का है, जब उस सैनिक की विधवा तिरंगे को सम्मान सहित सेना के जवानों के सुपर्द कर रही है।  पीछे बूढा पिता,  शहीद का बेटा व् उसकी माँ दिखाई दे रहे है। हदय को चीर देने वाला दृश्य है।  नमन ऐसे हजारों परिवारों को।

जय हिन्द ! 




Thursday, 29 December 2016

Happy new year message

From my whatsapp.

🍀 Read with patience 🍀


USED  vs. LOVED




While a man was polishing his new car, his 6 yr old son picked up a stone and scratched lines on the side of the car.



In anger, the man took the child's hand and hit it many times;


not realising he was using a wrench.




At the hospital, the child lost all his fingers due to multiple fractures.




When the child saw his father...




with painful eyes he asked, 'Dad when will my fingers grow back?'



The man was so hurt and speechless;

he went back to his car and kicked it a lot of times.



Devastated by his own actions.....


sitting in front of that car he looked at the scratches;




the child had written 'LOVE YOU DAD'



The next day that man committed suicide. . .








Anger and Love have no limits;


choose the latter to have a beautiful, lovely life.....




Things are to be used and people are to be loved.




But the problem in today's world is that,




People are used and things are loved.




In this year, let's be careful to keep this thought in mind:



Things are to be used,


but People are to be loved.




Watch your thoughts; they become words.



Watch your words; they become actions.



Watch your actions; they become habits.



Watch your habits they become character;



Watch your character; it becomes your destiny.



Do u know the relationship between your two eyes?

They blink together,
 move together, cry together, see things together & sleep
 together.


Even though they never see each other.



Friendship should be just like that!


Life is vanity without FRIENDS.

Wednesday, 28 December 2016

लहसुन, मिर्च वाली चटनी

लहसुन, मिर्च वाली चटनी 
लहसुन मिर्च की चटनी बनाने के लिए सबसे पहले जरुरी सामग्री :-
10 साबूत लाल मिर्च
50 ग्राम धनिया
20 ग्राम हल्दी
10 ग्राम मेथी दाना
100 ग्राम लहसून
100 ग्राम देसी घी
200 ग्राम तैल खाने का
छोंक के लिए जीरा, कलौंजी।
नमक स्वाद अनुसार बाद में डालने के लिए।
उपरोक्त सामग्री साबूत अवस्था में होनी चाहिए।
अब सबसे पहले लाल मिर्च को बीज अलग करके पानी में भिगो दीजिये।  मेथी दाने को भी अलग से भिगो दीजिये। लहसून को छील कर साफ़ कर लीजिये।  अब एक घंटे बाद जब लाल मिर्च भीग जाये तो बहुत अच्छा रहेगा अगर आप के पास लोड़ी भाटा (मिर्च को बारीक करने के लिए पत्थर ) हो।  अगर ये नहीं है , तो आप मिक्शी में मिर्च को पीस सकते है।  लेकिन जो स्वाद भाटे पर पिसाई से आता है, वो मिक्शी में नहीं आएगा। अब जब मिर्च, धनिया,हल्दी, लहसून को भाटे पर पीस रहे है, तो पानी के साथ साथ लास्ट में छाछ का प्रयोग करे।  जब सारी सामग्री में लोच आने लगे उस वक्त आप थोड़ी थोड़ी मात्रा में छाछ मिलाकर पिसाई करते जाएँ।  जब अछी तरह से लोच आ जाये तो नमक मिलाकर एक कटोरी में निकल ले। अब एक छोंक मारने वाले बर्तन में देसी घी आग पर चढ़ाएं हल्का गरम पर इसमें जीरा व् कलौंजी तड़का लें. जब तड़क जाये तो कटोरी वाली मिर्च इसमे छोंक दें। 2 मिनिट बाद खाने वाले तैल को डाल दें। अब धीमी आंच पर गर्म होने दें। मेथी दाने डाल दे। जब 7 - 8 मिनिट तक गरम होकर पक जाये तो उतार लें। ठंडा होने पर 2 चम्मच ताजा दही मिला दें।  लीजिये आप ने कभी नहीं खाई वैसी लहसून वाली लाल मिर्च चटनी तैयार है।  जैसा आपको इस पिक्चर में बाजरे वाली रोटी पर दिखाई दे रही है। तो अगली बार हरी प्याज वाले रायते के लिए तैयार रहें। अगर खाने में स्वाद आये तो कमेंट जरूर करें।
  

Monday, 26 December 2016

A Small Story

From my face book wall

अगर मेंढक को गर्मा गर्म उबलते पानी में डाल दें तो वो छलांग लगा कर बाहर आ जाएगा और उसी मेंढक को अगर सामान्य तापमान पर पानी से भरे बर्तन में रख दें और पानी धीरे धीरे गरम करने लगें तो क्या होगा ?

मेंढक फौरन मर जाएगा ?
जी नहीं....

ऐसा बहुत देर के बाद होगा...
दरअसल होता ये है कि जैसे जैसे पानी का तापमान बढता है, मेढक उस तापमान के हिसाब से अपने शरीर को Adjust करने लगता है।

        पानी का तापमान, खौलने लायक पहुंचने तक, वो ऐसा ही करता रहता है।अपनी पूरी उर्जा वो पानी के तापमान से तालमेल बनाने में खर्च करता रहता है।लेकिन जब पानी खौलने को होता है और वो अपने Boiling Point तक पहुंच जाता है, तब मेढक अपने शरीर को उसके अनुसार समायोजित नहीं कर पाता है, और अब वो पानी से बाहर आने के लिए, छलांग लगाने की कोशिश करता है।

          लेकिन अब ये मुमकिन नहीं है। क्योंकि अपनी छलाँग लगाने की क्षमता के बावजूद , मेंढक ने अपनी सारी ऊर्जा वातावरण के साथ खुद को Adjust करने में खर्च कर दी है।

          अब पानी से बाहर आने के लिए छलांग लगाने की शक्ति, उस में बची ही नहीं I वो पानी से बाहर नहीं आ पायेगा, और मारा जायेगा I

          मेढक क्यों मर जाएगा ?

          कौन मारता है उसको ?

          पानी का तापमान ?

          गरमी ?

          या उसके स्वभाव से ?

          मेढक को मार देती है, उसकी असमर्थता सही वक्त पर ही फैसला न लेने की अयोग्यता । यह तय करने की उसकी अक्षमता कि कब पानी से बाहर आने के लिये छलांग लगा देनी है।

          इसी तरह हम भी अपने वातावरण और लोगो के साथ सामंजस्य बनाए रखने की तब तक कोशिश करते हैं, जब तक की छलांग लगा सकने कि हमारी सारी ताकत खत्म नहीं हो जाती ।

         लोग हमारे तालमेल बनाए रखने की काबिलियत को कमजोरी समझ लेते हैं। वो इसे हमारी आदत और स्वभाव समझते हैं। उन्हें ये भरोसा होता है कि वो कुछ भी करें, हम तो Adjust कर ही लेंगे और वो तापमान बढ़ाते जाते हैं।

            हमारे सारे इंसानी रिश्ते, राजनीतिक और सामाजिक भी, ऐसे ही होते हैं, पानी, तापमान और मेंढक जैसे। ये तय हमे ही करना होता है कि हम जल मे मरें या सही वक्त पर कूद निकलें।

(विचार करें, गलत-गलत होता है, सही-सही, गलत सहने की सामंजस्यता हमारी मौलिकता को खत्म कर देती है)

     देश किसी चोर, उचक्के या बदमाश के कारण नहीं बुद्धिमानों की चुप्पी की वजह से बर्बाद होता है ।

Wednesday, 21 December 2016

बाजरा की रोटी और। .........

बाजरा की रोटी और। .........
बाजरे के आटे की रोटी, लहसुन की मिर्च वाली चटनी, हरी प्याज का रायता।
सबसे पहले आपको बाजरे का आटा लेना होगा। फिर जैसे गेहूं के आटे को रोटी बनाने के लिए गुंथा जाता है, वैसे न गूंथ के केवल एक रोटी में समाये उतना आटा लेना है। उसमे धीरे धीरे इतना पानी मिलाओ की आटा एक गोल मोल पिंड का आकर ले सके। न ज्यादा गीला ना ज्यादा सख्त। अब इसे धीरे धीरे रोटी की सकल देने के लिए अपने दोनों हाथों में फ़ैलाने की कोशिश करें। कभी इस हाथ में कभी उस हाथ में।  यह प्रक्रिया जल्दी जल्दी एक हाथ से दूसरे हाथ में जारी रखे।  देखते जाएँ रोटी अपनी सकल ले रही है।  वैसे यह प्रेक्टिस से आसानी से हो जाता है।  एक दो बार कोशिश करेंगे तो आसान हो जायेगा। अब जब रोटी अपनी गोल सकल ले ले तो इसे गर्म तवे पर डाल दें।  उचित रहेगा तवा चूल्हे पर हो और आपके पास पर्याप्त लकड़ी (सूखी लकड़ी ) हो।  आंच ज्यादा मंदी और ज्यादा  कम न हो। चूल्हे में पर्याप्त मात्रा में खीरे (सुखी लकड़ी जलने के बाद बने चारकोल जो लाल गर्म) हों। अब जब इतना हो जाये तो तवे पर रोटी डाल दे। धीरे धीरे रोटी सिकने की अवस्था में आएगी। आप 3 मिनट बाद सावधानी पूर्वक रोटी को तवे पर ही पलट दें। अब 3-4 मिनट दूसरी तरफ से सिकने दें। जब 3 - 4 मिनट बाद रोटी दूसरी तरफ से सिक जाये तो, गर्म चारकोल को चूल्हे से थोड़ा सा बहार की साइड में खींच ले।  ध्यान रहे पुरे बाहर नहीं आने चाहिए। अब रोटी को चूल्हे के एक पाए के सहारे इन चारकोल पर खड़ा कर दे।  और चिमटे की सहायता से धीरे धीरे घुमाते रहें। फिर रोटी को दूसरी तरफ से घुमाते रहे। अब आपकी रोटी सिक चुकी है। ये रोटी एक तरफ से सख्त तथा दूसरी तरफ से पपड़ी वाली होगी। अब फूंक मारकर रोटी को थाली में रखे। थाली में रखने के बाद देसी घी लें तथा पपड़ी वाली साइड में हल्का सा मिर्या (घी डालने का यन्त्र) की सहायता से गढ़ा बना लें। अब इसमे जितना समाये उतना घी डाल दे तथा मिर्या को रोटी की पपड़ी के ऊपर घुमाते हुए पूरी रोटी के ऊपर फेर दे।  ध्यान रखें गरमा गर्म रोटी पर ही यह करना है। इस प्रकार यह बाजरे की रोटी तैयार  हो गई। अब आप इसे लहसुन व मिर्च की चटनी तथा हरी प्याज के रायते के साथ परोस सकते है।
                                                    यह सर्दियों का भोजन गांवों में मेवा कहलाता है। इसे दोपहर के भोजन में अक्सर खाया जाता है।
अगली बार में इसके साथ खाई जाने वाली लहसून की चटनी के बारे में बताऊंगा।  फिर हरी प्याज का रायता कैसे बनाया जाता है, उसके बारे में।
अगर आप को पसंद आये तो कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर शेयर करें।



इसके क्या लाभ हैं।
1 . जिन लोगों को अल्प रक्तता(खून की कमी हीमोग्लोबिन) प्रॉब्लम हो उन लोगों के लिए राम बाण औषधि है। 2 . शरीर में इम्युनिटी पावर को बढ़ता है।
3 . हडिड्यों के जोड़ो के दर्द में राहत।
4 . बढती उम्र को रोकता है।
5 . द्रश्य शक्ति को बढाता है।
सावधानी :-
जिन लोगों को कोंस्टीपेशन (कब्ज ) की शिकायत हो उन्हें एक साथ कई रोटियों का सेवन करने से बचना चाहिए। गर्मी की ऋतु में शाम के भोजन में शामिल करने से बचना चाहिए।  

Monday, 19 December 2016

युग युग की बात है।

हम कितने अागे निकल आये । एक जमाना था जब घर की महिलाएं अल सुबह उठकर घर के सद्स्यों के लिए चक्की से अनाज की पिसाई करती थी। घर के अन्य सद्स्यों के उठने से पहले वे ये काम निपटा लेती थी। उस समय संयुक्त परिवार हुआ करते थे। परिवार में 10-12 सद्स्यों का होना मामुली बात होती थी। कल्पना करो घर की एक - दो महिलाओं के जिम्मे यह काम होता था। कितनी शारीरिक मेहनत होती थी। स्वास्थ्य का राज इसी शारीरिक मेहनत के पीछे छिपा था। आज माॅर्डन लेडी जिम में जाकर पैसा देकर भी वह स्वास्थ्य नही कमा पाती है। कमोबेस यही हालत पुरूष की है। पुरूषों का काम भी कोई कम मेहनत वाला नही था। कुॅएं से रस्सी के द्वारा पानी निकालना घर के सदस्यों के अलावा, घर में जितने पशु होते थे, उन्हें भी कुँए से निकाल कर पानी पीलाना पड़ता था। आज परिस्थतियों में आमुलचुल परिवर्तन हो चुका है। आज की जैनेरेशन को अगर यह फोटो दिखाई जाये तो कौतुहल से पुछेगें कि यह क्या है। अगर कँए से पानी रस्सी के द्वारा पानी निकालने की बात बताओगे तो यकीन ही नही करेगें। शक हो तो बात कर के देख लेना।

धन्यवाद

राजेश कुमार

9680615806

Sunday, 18 December 2016

नरेगा

नरेगा भारत के ग्रामिण क्षेत्र की आर्थिक जरूरतों को पुरा करने में कुछ हद तक सफल रही है। लेकिन इसके दुसरे प्रभाव ज्यादा नुकसानदायक साबित हुए हैं। नरेगा से ग्रामिण क्षेत्र में मजदुुरी की दरों में अप्रत्यासित रूप से वृद्धि हुई है। वृद्धि तक तो ठीक है लेकिन इस योजना ने ग्रामिण क्षेत्र की श्रम शक्ति को नकारा बना दिया है। पहले जो मजदुर नियमित रूप से मजदुरी पर जाया करता था, वह अब नरेगा की वजह से अपनी कार्य क्षमता खोता जा रहा है। क्योकि वह नरेगा पर निर्भर होने लगा है। नरेगा में नियमित रूप से मजदुरी नही है। साथ ही नरेगा अगर सही मायनों में लागु व कार्यान्वित होती तो अब तक के कार्या दिवसों के आधार पर भारत की तस्वीर बदल गई होती।

Funny Sunday

आज रविवार है, तो थोड़ा मस्ती मजाक हो जाये।
पेश है, क्लासिकल संगीत की वो उँचाईयाँ जिनको सुनकर आप हँस हँस कर लोट पोट हो जायेंगें।
हर इंसान के मन में एक कलाकार होता है, और वो अपनी कला का प्रदर्शन किस तरह से करता है, एक अंदाज देखिय।
वैसे संगीत के बड़े बड़े दिग्गजो ने अभी तक एैसी प्रस्तुति नही दी होगी। शायद देखी भी न हो।

video
देखिये आनंद लिजिये, शेयर किजिए।

Saturday, 17 December 2016

लूट सैै भई

 लोकतंत्र का चौथा स्तंम्भ कहे जाने वाले प्रिंट मिडिया नें लोगौं को, लोगौं को लूटने की खुली छूट दे रखी है। कर तो ये काम हर कोई रहा है, लेकिन लोकतंत्र के प्रहरी, रखवाले, समाज का दर्पण आदि महत्तवपूर्ण उपाधियों से सुशोभित ऐसी संस्थाऔ को इस प्रकार के तुच्छ लाभ से दूर रहकर समाज में जागरूकता लानी चाहिए।

आये दिन हम अखबारों में ऐसै ढेर सारे विज्ञापन देखते है, जो रोजगार उपलब्ध कराने में बेरोजगारों की मदद करते हैं। ये विज्ञापन बेरोजगारों को लुभाते है, व दिये गये नंबरो पर काॅल करते है, वहां बैठे अक्सपर्ट ठग उनके फोन रिसिव करते हैं। उसके बाद सिलसिला शुरू होता है ठगी का, जो लुट जाने के बाद समझ में आता है। कभी बिना इंटरव्यु के नौकरी, कभी घर बैठे कमाई, कभी अपने घर पर मोबाईल टाॅवर लगाने के, कभी विजेस भेजने के, कभी आॅनलाईन पार्ट टाईम जोब। यह तो एक बानगी है । न जाने किस किस प्रकार के लुभावने विज्ञापनों से बेरोजगारों को ठगा जा रहा है। जरूरत है ऐसै लुभावने विज्ञापनों पर रोक लगाने की, जिससे बेरोजगारों के साथ होने वाले छल को रोका जा सके।

Friday, 16 December 2016

अलगोजा

अलगोजा ये एक वाद्द यंत्र है। इसे बजाने वाला निपुण कलाकार होता है। इस वाद्द यंत्र में श्वास लेकर मूँह के द्वारा लगातार बिना क्रम टुटे निकालने में निपुण ही इसे बजा सकता है। प्राय: यह मेलों के अवसर पर बजाते है। इस से मधुर स्वर लहरी निकलती है। सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है। इसेे बजाने वाले कलाकार बहुत कम है। रात के समय जब इसकी स्वर लहरियां कानो में पड़ती है तो लगता है जैसे शहद में भीगी हुई मधुर झंकार हो। अक्सर मेंलो में बजाये जाने वाले इस यंत्र के स्रोता बहुत है, लेकिन सुनने को आसानी से नही मिलता है। अब आप कभी किसी ग्रामिण परिवेश के मेले में जाये तो आप को यह सुनाने बजाने वाले मिल जायेगें । जहाँ दर्शकों की भीड़ सी लगी हो वहाँ पर जाकर देखना। गोर से देखना व सुनना यह बहुत ही विलक्षण कला है। खासकर पशु मेलें में आसानी से देख सुन सकते हैं।

मैं आप को सुना तो नही सकता लेकिन बजाते हुए एक कलाकार की फोटो जरूर शेयर कर रहा हूँ। इसको देखकर ही आनंद से भर जायेगें। यह नवलगढ़ के बदराना पशु मेले की है।

शहर से गांव की और ...: शहर से गांव की और

Thursday, 15 December 2016

शहर से गांव की और

शहर से गांव की और
कितना अल्हड़ जीवन था बचपन का। न कोई टारगेट, न कोई काॅम्पिटशन, खाया पीया मस्त। खेलना दिनभर, छोटे छोटे झगड़े, रूठना, आसानी से फिर मान भी जाना। ये अपने गांवो में ही था। खुला वातावरण, शुद्ध ताजा हवा, शुद्ध खाना सब गांंवो में मिलता था। शाम को जब खेतों से ढोर, पशुओं के साथ लौटते तो उनके पैरों से धुएं का गुब्बार सा बन जाता था। वह गुब्बार आसमान में छा जाता और उससे मिट्टी की सौंधी खुशबु आती, बड़ा अच्छा लगता था। मजे कि बात कोई एलर्जी, कोई बिमारी नही होती थी। इसके पीच्छे कारण यह था कि, शुद्ध देशी खान पान से इम्युनिटी पावर इतना बढ़ जाता था की कोई रोग पास नही फटकता था। शाम को चिमन्नी (काँच की छोटी बोतल में कपड़े की बत्ती बनाकर ढक्कन में छेद कर के थोड़ा सा बाहर निकालकर मिट्टी का तैल भरकर रखते थे) की रोशनी में चुल्हे पर बनते हुए खाना देखने का आनंद ही कुछ और था। काश वो बचपन लौटा दे कोई। शहर की आपा धापी से दूर शांत चाँदनी रातों का मज्जा आज भी गुदगुदा जाता है।

राजेश भास्कर
9680615806

प्रकृति


प्रकृति अपना सौंदर्य पता नही कितने रूप में दिखाती है। कभी बारीश कभी गरमी तो कभी सर्दी के रूप में। वर्षा के मौषम में चारो तरफ हरियाली होती है, गर्मी के समय भंयकर धूप हमें हलकान करती है, तो सर्दी के समय ठंड परेशान करती है।
वही सर्दी का मौषम स्वास्थ्य की दृष्टि से बहूत अच्छा होता है। आप सर्दी के मौषम में अपने स्वास्थ्य को उत्तम बना सकते है। क्योकी इस मौषम में जल्दी से थकान नही महसूस होती है। खान पान की दृष्टि से सर्दी का मौषम बाकी मौषम की अपेक्षा उत्तम माना गया है। इस मौषम में शरीर को ज्यादा ऊर्जा की आवश्कता होती है, इसलिए गरिष्ट भौजन भी आसानी से हजम हो जाता है। गांवो में इस मौषम में गूंद के लड्डू बनाकर खाये जाते है। खेतो में गैहूँ, चना, सरसों, जौ, मैथी की फसल लहलाती है, जिससे प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। मेरे खेत का इस मौषम का एक चित्र यहाँ आपके अवलोकन के लिए प्रस्तुत है।

Wednesday, 14 December 2016

तुम कौन हो?

    अब मेरी बात मान लो, क्योंकि वो तो 1948 में ही चला गया था।


 दूध को दुखी करो
तो दही बनता है
दही को सताने से
मक्खन बनता है

मक्खन को सताने से
घी बनता है

दूध से महंगा दही है,
दही से महंगा मक्खन है,
और मक्खन से महंगा घी है

किन्तु इन चारों का रंग एक ही है
 *सफेद*

इसका अर्थ है
बाऱ- बार दुख और संकट आने पर
भी जो इंसान अपना रंग नहीं बदलता,
समाज में उसका ही मूल्य बढ़ता है

*दूध* उपयोगी है
किंतु एक ही दिन के लिए,
फिर वो *खराब* हो जाता है....!!

*दूध* में एक बूंद *छाछ* डालने से वह *दही* बन जाता है
जो केवल दो और दिन *टिकता* है

 *दही* का मंथन करने पर *मक्खन* बन जाती है,
यह और तीन दिन टिकता है....!!

 *मक्खन* को उबालकर *घी* बनता है
*घी* कभी खराब नहीं होता....!

एक ही दिन में बिगड़ने वाले *दूध* में कभी नहीं बिगड़ने वाला *घी* छिपा है....!!

इसी तरह
आपका *मन* भी अथाह *शक्तियों* से भरा है,
उसमें कुछ *सकारात्मक विचार* डालो
अपने आपको *मथो*
अर्थात *चिंतन* करो....
अपने *जीवन* को और *तपाओ*
और तब देखना

*आप कभी हार नहीं मानने वाले सदाबहार व्यक्ति बन
जाओगे....!!*

मोती डूँगरी गणेश मंदिर

मोती डूँगरी गणेश मंदिर, जयपुर के ख्यात मंदिरो में से एक है। यहाँ पर हर बुधवार को श्रदालुओं का मेला लगता है। मंदिर जयपुर के मुख्य मार्ग JLN (जवाहर लाल नेहरू) मार्ग पर मोति डूँगरी की तलहटी में स्थित है। हाल के वर्षों में यह राज्य सरकार व JDA के कारण विवादों में था। विवाद का मुख्य कारण श्रदालुओं को नियंत्रित लिए लगाई गई रैलिंग थी। जिसे अब मंदिर प्रशासन व श्रदालुओं की मांग व न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण हटाना शुरू किया है। मंदिर अब श्रदालुओं को पहले से ज्यादा आकर्षित कर रहा है। राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में स्थित गणेश मंदिर के बाद श्रदालुओं की आमद में ये दुसरे नंबर पर आता है। गणेश चतुर्थिि पर विशेष आयोजन होते है, व दूसरे दिन सवारी निकलती है, जो 15 km दूर पहाडियों में गढ़ गणेश पहाड़ी पर जाकर विषर्जित होती है। आज बुधवार है और आज यहाँ पर श्रदालुओं की भीड़ धीरे धीरे बढ़ रही है। बोलो गणेश जी महाराज की जय।



राजस्थान के मेले

राजस्थान मेलों के लिए मशहूर
है।
राजस्थान के नवलगढ़ कस्बे के सुप्रसिद्ध बदराना पशु मेले में लगी एक स्टाल का चित्र। नवलगढ़ हवेलियों के लिए विश्व विख्यात है। सर्दी के मौसम में यहाँँ पर विदेशी सैलानियों की आवक बहुत बढ जाती है। नवलगढ़ कस्बा राजस्थान के झुन्झुनूंं जिले में स्थित है। यहाँ पर पहूँचने के लिए आप जयपुर या दिल्ली से रेल, बस के माध्यम से सफर कर सकते हैं। कस्बा शेखावाटी के प्रमुख भ्रमणीय स्थलों में से एक है। कस्बे में प्रमुख दर्शनिय स्थलों में , पोदारों, पाटोदिया, सेकसरिया, जयपुरिया, हवेलिया हैं। जिन पर मुगलकालिन शैली में चित्रकारी देखते ही बनती है।

Tuesday, 13 December 2016

Fun time थोड़ा तो होना ही चाहिए।

Technological JOKE
😜😜😜😜😝😝😝😝😝
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एक महिला ने .. "IT TECHNICAL Support" ..
को PHONE किया।
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महिला---"मुझे HUSBAND PROGRAM में दिक्कत आ रही है। "
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Technical Support---" कब से है यह दिक्कत...?"
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महिला---" देखिए, पिछले साल मैंने अपने BOYFRIEND को UPDATE कर HUSBAND INSTALL किया था।
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उसके बाद से ही पूरा SYSTEM SLOW हो गया है।
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खासतौर पर ‘FLOWER’ और ‘JEWELLERY’ APPLICATION ने काम करना बंद कर दिया है।
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ये Apps ‘BOYFRIEND' में अच्छी चलती थीं।

इसके अलावा HUSBAND ने ‘ROMANCE' Program भी UNINSTALL कर दिया है।
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इसकी जगह ‘NEWS', ‘MONEY' और ‘CRICKET' जैसे फालतू Program INSTALL हो गए हैं।
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 अब मैं इसे कैसे सुधारूँ ...???

Technical Support---" जी Madam, ‘HUSBAND Install करने के बाद ऐसी समस्या होती रहती है।
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सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि ‘BOYFRIEND' एक ENTERTAINMENT DEMO PACKAGE था,
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जबकि ‘HUSBAND OPERATING SYSTEM है।

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इसे सुधारने के लिए ‘आँसू Program Download करें।
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इससे ‘JEWELLERY' और ‘FLOWERS' Application अपने आप Install हो जाएँगे।

Warning:

हालांकि याद रखें, आँसू ज्यादा इस्तेमाल करने पर ‘HUSBAND
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' हमेशा के लिए ‘SILENCE’ या ‘BEER' wisky Mode पर चला जाएगा।
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साथ ही ‘HUSBAND' के Original Package को Disturb न करें।
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ऐंसा करने पर नया VIRUS ‘GIRLFRIEND'
.
 Download हो जाता है।

इसके अलावा ‘BOYFRIEND' को दोबारा INSTALL करने की कोशिश भी न करें।
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ऐसा करने पर आपका LIFE OPERATING SYSTEM Crash हो जाएगा। "
😛😀😀😀😀😋😋😝😝😝😝

जयपुर मे मेट्रो

जयपुर मे मेट्रो रेल सफलतापूर्वक द्वितिय सौपान की तरफ बढ़ रही है। प्रथम चरण में चांदपोल से मानसरोवर तक 9 स्टेशन कवर किये गये।
द्वितिय चरण में चांदपोल से चोपड़ की तरफ का काम युद्ध समतर पर चल रहा है।
आम लोगों को बहुत राहत मिली और आवागमन में सुविधा के साथ समय व धन दोनों की बचत हुई।
इसी कड़ी़ी में मैं और मेरा परिवार गत 14 नवम्बर 2016. बाल दिवस पर बच्चो की स्पेशल डिमांड के तहत मेट्रो का सफर किया ।

ठेट राजस्थान

सांई ईतना दिजिए, जामे कुटुंब समाय।
में भी भुखा न रहूँ, साधु न भुखा जाय॥

हल्की हल्की ठंड की शुरूआत हो चुकि है। एेसै में चुल्हे के पास बैठकर गरमा गरम खाने का मजा साथ में परिवार हो तो और बढ़ जाता है। मेरे बच्चे अपनी मम्मी के पास बेठ कर खाने का इंतजार कर रहे हैं। यह फोटो मेंनै पिछले वर्ष दिसम्बर महिने में लिया था। यादें ताजा हो गई।


राजस्थान के मेले का एक फोटो

राजस्थान के मेलों की बात ही निराली है।
अलगोजो के साथ फोक म्युजिक और समुह गान आनंद की चरम सीमा तक ले जाता है।

पसंद आये तो कमेंट जरूर लिखे ।
संग्रह मे और है जिनको आप तक पहुंचा सकूं।

नोट बंदी और ईमान

प्रिय मित्रों..!

मैंने कहा था *बैंक कर्मियों को इतनी जल्दी सैलूट मत मारो।*

*बेईमानी इस देश की रग-रग में..!*
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इस देश में ईमानदार वही है जिसके टेबल पर पैसा नहीं है । जिनके टेबल पर पैसा नहीं वो सही टाइम पर ऑफिस छोड़ देते हैं, और वही जब टेबल पर माल आने लगता है तो 8 बजे शाम तक जनसेवा करते हैं।

इस देश में *पुलिस भ्रष्ट* तभी तक लगती है जब तक उनका बेटा दारोगा में भर्ती नही हुअा। इस देश में *टीचर तभी तक निट्ठले* लगते हैं जब तक उनकी बेटी टीचर नही बनी है।

बुरा न माने जैसे *जर्मन जन्म से ही योद्धा, जापानी जन्म से नियम मानने वाले, वैसे ही हम जन्म से भ्रष्ट होते है।*
भ्रष्टता हमारे ब्लड और संस्कार में ही है, ये मात्र कानून बनाने से नहीं जाने वाला।

एक नियम कानून एक का मुँह बंद करता है तो दूसरे प्यासे प्रतीक्षित का मुँह खोल देता है।

*एकलव्य के साथ नाइंसाफी* का रोना रोने वाले अपने *भीतर का द्रोण* नहीं देख पाते है।

*ज्वेलर्स* को 8 तारीख को मौका मिला उन्होंने खूब बनाया...
और-
अब *बैंक मैनेजर* की बारी है।
शायद-
कल किसी *इन्कम टैक्स* वाले की बारी हो।

हम *भारत माता की जय,*
आज़ादी... आज़ादी..
जय-भीम,
समाजवाद,
*लोहिया वाद की जय* बोलकर अपने अपने हिस्से का देश लुट रहे हैं।

कल तक महँगी प्याज होने पर लोग कहते थे की देश की करोडों जनता नमक-प्याज खाकर जीवन जीती है, और आज वही *गरीब-जनता* ना जाने कौन सा धन जमा कर रही है...????

नोट बंदी अपने उद्देश्य में सफल हो या असफल... इस बात पर तो मुहर लग गयी की 100 में 90 बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान।

नहीं , नहीं मुझे कुछ अपवाद मत दिखाएँ। मैंने घर-घर में देखा है औरत जब 4 बच्चों को दूध देती है, तो-
अपने बेटे की गिलास में थोड़ी ही सही, पर *मलाई अधिक* डालती है।

भाई अपने सगे भाई को पुश्तैनी जमीन एक हाथ टुकड़ा भी अधिक देने को राजी नही होता।

कितना भी कमाओं पर नज़र बाप के पेंशन पर जरुर रहेगी कि-
*कहीं बेटी को कुछ दे तो नहीं रहे..?*

बुरा ना मानें...
इस देश में *बेईमानी की पहली पाठशाला ही परिवार* ही है।

हम चाहते की *लंगोट पहनने वाला गाँधी पड़ोस* में पैदा हो...
और-
अपने घर *गुलाब लगाने वाला नेहरु।*

11 लाख का कोट देखने वालों को अपने जन्मदिन पर करोड़ों देकर *सिने तरिकाअों का अपने पैतृक-गाँव में ठुमके* लगवाना नहीं दिखाई देगा...💃💃💃💃

इस देश में ही 42,000 ₹ का मोबाइल और 5,000 ₹ के स्वेटर पहनने वाले मुख्यमंत्री के पैर में चप्पल देखकर... आठ आठ आँसू रोकर ईमानदारी की दुहाई देने वाले पाखण्डी भी हैं।
पर-
सौ टके का सवाल ये *पाखंडी-मुर्दे* इतिहास नहीं मानते, JNU कैंपस में बनाते हैं।
फ्री सेक्स वाली सोसाइटी जहाँ वातानुकूलित कमरे में बैठ कर *ट्विटर पर मजदूर दिवस* की बधाई दी जाती है।

वास्तव में जब मैं कहता हूँ कि-
*आज़ादी हम पर थोपी गयी थी हम आजाद होने लायक नहीं थे..!*
तो आपको बुरा लगता है....??

पर-
उस *हावड़ा-पुल* को बुरा नहीं लगता है जो बना तो था अंग्रेजों के समय और आज भी चल रहा है। ये देखकर की सादी साड़ी में *सादगी का ढोंग रचने वाली दीदी* के शहर का पुल कैसे अल्पायु में भरभरा कर गिर जाता है....???😳😰👎👎

भरभरा रहा मनुष्य ऐसे ही इस देश में सदियों से । वैसे किताबें तो खूब लिखी गयी पर *किताबें जीवन में उतरी* हैं क्या...??

ये देश शराब को नापाक हराम कहके अफीम/गाँजा पीने वालों का देश है।

अपनी *बहनों को सात तालों में छुपा* कर.. *दूसरों की बेटी बहनों को घूरने* (X-Ray करने) वाला देश है।

इस देश के *रग रग में भ्रष्टता है,* चाहे वो नोट बंदी में चीखे या न चीखे...😤😰😤

बस-
मुझे *एक ही ईमानदार* दिखाई दे रहा है...
और-
इस कुरुक्षेत्र में वो है *बर्बरीक*...

जिसने....
अपने ही हाथों अपनी गर्दन काटकर *(भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेकर)*  खूब तमाशा देख रहा है...🤔😳😰

उस बर्बरीक ने *सबको नंगा करके रख दिया है*....
गैरों को....
अपनों को....
मुझको, आपको....
सबको...

*वंदेमातरम्..!*🙏🇮🇳🙏
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Monday, 12 December 2016

हम कहाँ गलत हैं?

लेख पूरा पढ़े ..

प्रश्न :- मैं एक पढ़ा लिखा मुस्लिम हूँ l मेरी अपनी खुद की एक राजनीतिक सोच है और यदि मैं मोदी का विरोध करता हूँ तो मैं देशद्रोही कैसे हो गया ?

उत्तर :- मोदी जी ने अपनी शख्शियत ऐसी बनाई है की वो देशभक्ति का  पर्यायवाची शब्द बन गये है l और जब कोई उनके विरोध में खड़ा होता है तो वो स्वतः अपने आप को देशद्रोहीयों की कतार खड़ा पाता है l

ऐसी परिस्थिति में वो और भी ज्यादा  खिजकर मोदी विरोध करता है और मोदी विरोध करते करते देशविरोध की सीमा भी लांघ जाता है l

प्रश्न :- मोदी जी देशभक्ति का पर्याय कैसे है ?

उत्तर :- मोदी जी का आज तक का राजनीतिक जीवन निष्कलंक रहा है l
उन्होने हमेशा अपने राज्य और देश की भलाई के लिये काम किया है l

मोदी जी ने कोई भ्रष्टाचार नही किया

मोदी जी के पास अपनी कोई सम्पत्ति नही है l

मोदी जी का अपना खुद का कोई परिवार नही है l

मोदी जी के भाई बहन अत्यंत साधारण जीवन यापन करते है l

प्रश्न  :- निष्कलंक !!!...लेकिन मोदी ने गुजरात में मुस्लिमों का कत्लेआम कराया था l वो ?

उत्तर :- दंगे हमेशा दुर्भाग्यपूर्ण होते है l और ये पहला या अंतिम दंगा नही था l इससे पहले भी महात्मा गाँधी की हत्या के बाद उनके अहिंसा और  शान्ती के समर्थको ने 6000 मराठी ब्राह्मणों का महाराष्ट्र में कत्लेआम किया  था l इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद भी हजारों सिखों का संहार किया गया था l कश्मीर में दस सालों तक कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करके उनको बेघर किया गया लेकिन मुस्लिमों की तरह कोई छाती नही पीटता l उत्तर प्रदेश में आये दिन कहीँ न कहीँ दंगा होता ही रहता है लेकिन मोदी जी ने जिस तरह से गुजरात में दंगा कंट्रोल किया उसके बाद कोई दंगा नहीँ हुआ l

प्रश :- लेकिन मोदी की विचारधारा rss वाली है उसे मैं क्यों स्वीकार करूँ ?

उत्तर :- पिछले 60 साल से राष्ट्रवादी लोग भी कॉंग्रेस की गली सड़ी झूठी  विचारधारा को न चाहते हुए भी स्वीकार करते रहे है l और मोदी जी कोई डेमोक्रेसी को hijack करके तो P M बने नहीँ है l  अब ये बदलाव स्वीकार करना ही होगा l और rss अन्य मुस्लिम तंजीमों  की तरह कोई आतंकवादी संगठन तो है नहीँ और न ही कोई banned organisation है l

 प्रश्न :- फ़िर हिंदू उनका विरोध क्यों करते है ?

उत्तर :- अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते या अपने कमअकल होने की वजह से l

प्रश :- ये कौन सी बात हुई की मोदी के विरोध में है तो वो कमअकल या गद्दार  है ?

उत्तर :- जो हिंदू, मोदी rss का विरोध करते है वो कमअकल होने की वज़ह से  इतिहास का सही अध्ययन नहीँ कर पाये और वर्तमान का सही विश्लेषण नहीँ कर पाते l

वो मंदबुद्धि होने के कारण नहीँ समझ पाते की राष्ट्रवाद क्यो ज़रूरी है

 प्रश्न :- लेकिन ये राष्ट्र अकेले हिन्दुओं का नहीँ है हमारा भी है l

उत्तर :- नहीँ इस्लाम भारत का मूल धर्म नहीँ है l यह आयातित धर्म है l

प्रश्न :- लेकिन हम तो भारतीय  मुसलमान है

उत्तर :- नहीँ आप लोगों को आइडेंटिटी crisis है l

प्रश्न :- अब ये identity क्राइसिस क्या है  ?

उत्तर :-  आइडेंटिटी क्राइसिस या  दूसरे शब्दों मे परिचय अज्ञानता या परिचय संकट है l
और किस तरह ये परिचय अज्ञानता कुंठा का रुप धारण करके देश और समाज को एक लम्बे समय से सिर्फ और सिर्फ  नुकसान पहुँचाती रही है

इसको थोड़ा विस्तार से समझते है

बाहर से असभ्य दुर्दांत मुस्लिम आक्रांता किस तरह से भारत मे आये और यहाँ की संस्कृति को नष्ट किया ये एक विषय है दूसरा विषय है आज मौजूद उनके पैरोकारों का, जो जूठी आइडेंटिटी के साथ जी रहे है,
उनके पूर्वजों का सच जो वो हमेशा नकारते है  l

आज मौजूद 20-25 करोड़ मुस्लिम  वही है  जिनके पूर्वजों को बलात तलवार की नोक पर मुस्लिम बनाया गया              या
ज़मीन और जागीरदारी का लालच देकर उनको मुस्लिम  बनाया गया                       या  वो मुस्लिम बने जिनको तथाकथित तौर अपने हिंदू  समाज में नीचा स्थान प्राप्त था  या
वो मुस्लिम बने जिन्होने अपने परिवार और समाज को अपने कृत्यों से नीचा दिखाया और उनका सामाजिक व पारिवारिक बहिष्कार किया गया l
लेकिन अब मसला ये है की क्या आप इन सत्यों को आत्मसात करते है l

प्रश्न :- ये क्या बकवास है ?

उत्तर :- क्यों क्या ये सच नहीँ की महमूद गज़नवी गौरी तैमूर ...और न जाने कितने लुटेरे थे और वो सब इस्लाम को  मानते थे l

प्रश्न :-  तो अँगरेज़ भी तो इंडिया को लूटने आये थे l

उत्तर :- बिल्कुल, इसीलिए उनको  हमने भगाया ना वापस

प्रश्न :- आपने नहीँ महात्मा गाँधी ने भगाया

उत्तर :- exactly, जब अँगरेज़ और मुस्लिम दोनो ही लुटेरे थे और दोनो ही बाहर से आये थे तो गाँधी जी सिर्फ अंग्रेजों से ही क्यों लड़े l और न केवल अंग्रेजों से लड़े बल्कि हमेशा हिंदू मुसलमानो में मुसलमानो का पक्ष लेते रहे इसीलिए पंडित नाथूराम गोडसे ने उनका वध किया था
और इस विषय में एक पुस्तक भी है "गाँधी वध क्यों "

*गांधी वध क्यों* एक ऐसी पुस्तक है  जिससे डरकर कांग्रेस ने इस पर *प्रतिबंध* लगा दिया था

गाँधी वध क्यों ?

क्या थी विभाजन की पीड़ा ?

विभाजन के समय हुआ क्या क्या ?

विभाजन के लिए क्या था विभिन्न राजनैतिक पार्टियों दृष्टिकोण ?

क्या थी पीड़ा पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों की ... मदन लाल पाहवा और विष्णु करकरे की?

क्या थी गोडसे की विवशता ?

क्या गोडसे नही जानते थे की आम आदमी को मरने में और एक राष्ट्रपिता को मरने में क्या अंतर है ?

क्या होगा परिवार का ?

कैसे कैसे कष्ट सहने पड़ेंगे परिवार और सम्बन्धियों को और मित्रों को ?

क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?

क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को ... पुणे के ब्राह्मणों के साथ ?

क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?

क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का .. कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l

यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा भारतीय जनमानस पंडित नाथूराम गोडसे जी का कर्ज....

आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ....

पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं.अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए lरेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था,," आज़ादी का तोहफा " रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई

थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की... भयानक बदबू......

सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती, पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी. किसी भी गाडी पर हल्ला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी ... बलात्कार किये बिना.....?

जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी....

डॉक्टर ने पूछा क्यों ???

उन महिलाओं ने जवाब दिया... हम आपको क्या बताये हमें क्या हुआ हैं ?

हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता नहीं हैं...उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे.

"आज़ादी का तोहफा"

जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड) निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया l

1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा जी का आग्रह था...क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l

विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे....और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए.....पैसे  दो, नहीं तो मैं मर जाउगा....एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l

दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए... क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक आतंकवाद की आड़ में

दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई

ताबा नहीं रहना चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं...

जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला, गटर के किनारे

रहो लेकिन छत के निचे नहीं l क्योकि... तुम हिन्दू हो....

4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं....ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब

गांधीजी माइक पर से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर, वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ??

यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?

कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़ गंधासुर ... कितना महान ...

जिसने बिना तलवार उठाये ... 35 लाख हिन्दुओं का नरसंहार करवाया

2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l

10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा बेचा गया l

20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद

ऐसे बहुत से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो ...

परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज नहीं ...वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल

विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र ...

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आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि ... परन्तु यह सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित सीमा के अंदर बने l

और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान बनाए गए... क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया गया... या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l

परन्तु ऐसा नही हुआ .... यहाँ पर उल्लेखनीय है की मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी ...

यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था ... मोहनदास करमचन्द के अनुसार l

नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l

पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे ...

उन्होंने फिर से मांग की ... की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l

1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l

2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए .... कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए....

2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो ... (NH - 1)

3. जो दिल्ली के पास से जाता हो ...

4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो ... (10 Miles = 16 KM)

5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l

30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी ...मान लिया जाएगा