This blog is about the folk art, culture, eating habits, and living conditions of Rajasthan. We will keep you informed about the ancient history of Rajasthan and the state of present Rajasthan from time to time. Introduce you through the small documentary on the life of the gypsy of Rajasthan like 'Kalbeliya, Banjara, Bhopa, Satiya' etc.
किसान बचत कैसे करें भारत में किसान के लिए बचत ही उसका मुनाफा है। क्योंकि बाजार उसके अनुकूल नहीं है। जो भी किसान फसल उगाता है, वो पशुपालन भी करता है। इस प्रकार किसान पशुपालन के द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित करता है। ये अतिरिक्त आय ही उसकी बचत होती है। किसान अपने छोटे छोटे खोजी तरीकों से बचत के तरिके ढूंढता रहता है। आज हम यहाँ ऐसे ही एक तरीके की बात कर रहे है। जी हाँ किसान की बचत का एक तरीका जिसे अपनाकर किसान अपनी बचत व श्रम का बेहतर तरीके से उपयोग का सकता है। हम बात करेंगे चारा काटने वाली मशीन की। हर किसान पशुपालन करता है। पशुओं की देखरेख में उसका बहुत सा समय जाया होता है। अगर ऐसे तरीके अपनाकर वह कार्य करे तो उसके धन व समय की बचत होगी। आज हम इस वीडियो में हरा चारा काटने वाली मशीन के प्रयोग की बात करेंगे। एक मोटर से दो मशीन कैसे चलाएं जैसा की वीडियो में दिखाया गया है, सबसे पहले आप बाजार से 5 X 3 फ़ीट के दो पत्थर लेकर आएं। फिर चारा काटने वाली मशीन के पैरों के नाप से उस पर चार छेद करके नट व बोल्ट की सहायता से मशीन को अच्छे से उस पत्थर पर फिक्स कर लें। ...
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Shekhawati dance on folk music as a traditional dance
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Shekhawati dance on folk music
In Rajasthan , the music is according to the different castes in which these castes come - Langa , Sapera , Manganiar Bhopa and Jogi . Here there are two traditional classes of musicians , one Langa and the other demander . The song of women in traditional music in Rajasthan which is very famous, which is called ( panihari ). Apart from these musicians of different castes sing in different ways. Snake Bean playing snake is Nchata then bhopal which grass is singing. Music of Rajasthan A lot of songs have been sung on folk deities Apart from these, people of different castes sing different ways. If the snake beats the snake by singing the bean , then sing in the Bhodha fad . Rajasthan in the music Lokdewatao is also singing on which mainly Pabuji is sung, Baba Ramdev, Tejaji hymns etc. Lokdewataon.
Rajasthan's music is a music of Rajasthan which is a state of India . Its major music zones are Jodhpur , Jaipur , Jaisalmer and Udaipur . Similar music is also heard in the nearby nation Pakistan ( Sindh ).
Shekhawati dance on folk music. In this video a couple performs on DJ sound in a marriage party. The music is local Rajasthani. Rajasthan’s other popular somg is ‘Ghoomar’. Ghoomar is a traditional folk dance of Rajasthan, India. The dance is chiefly performed by veiled women who wear flowing dresses called ghaghara. It was ranked 4th in the list of "Top 10 local dances around the world" in 2013. The dance typically involves performers pirouetting while moving in and out of a wide circle. The word ghoomna describes the twirling movement of the dancers and is the basis of the word ghoomar. Ghoomar is often performed on special occasions, such as at weddings and during weddings, festivals and religious occasions. which sometimes lasts for hours.
As a traditional dance, Ghoomar often includes traditional songs such as "Gorband", "Podina", "Rumal" and "Mor Bole Re". Songs might be centered on royal legends or their traditions.
Karma dance or Karma Naach is a tribal dance. The Karma dance is a tribal community dance performed by the Gonds,Binjahal, Kharia, Oraon, Kisan and Kol and other tribal annually during the karma festival. Karma is a famous autumnal festival, it starts from the 11th day of the bright fortnight of the month of Bhadrab. It is performed in the tribal dominant areas of Western Orissa, Chhattisgarh and Madhya Pradesh. Karma means 'fate'. This folk dance is performed during the worship of the god of fate which is known as Karam Devta. People consider the god of fate as the cause of good and bad fortune.
For more video’s please subscribe the channel. We uploading the video’s an interval basis.
You can also watch more dance performance on below links
उष्णकटिबंधीय चक्रवात OCKHI: बंगाल की खाड़ी में कम दबाव क्षेत्र ने पश्चिमी-उत्तर-पश्चिम की ओर अरब सागर की और रुख किया है। पहले उष्णकटिबंधीय चक्रवात भयंकर कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित हो गया। फिर एक उष्णकटिबंधीय तूफान और आखिरकार पिछले कुछ दिनों में उष्णकटिबंधीय चक्रवात में। यह अब दक्षिणपूर्व अरब सागर और निकटवर्ती लक्षद्वीप क्षेत्र और पूर्व-मध्य अरब सागर श्रेणी 3 चक्रवात के रूप में स्थित है। आशंका है, कि यह अगले 24 घंटों में श्रेणी 4 चक्रवात में और तेज हो सकता है। अब तक यह एक उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ रहा है, और उत्तर-पश्चिम की ओर कुछ समय के लिए प्रस्थान करेगा और उसके बाद भारत के पश्चिमी तट की ओर उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ जाएगा। सूरत से लगभग 252 मील की दूरी पर उष्णकटिबंधीय चक्रवात 'ओखी' के पूर्वोत्तर अरब सागर में प्रवेश करने की संभावना नहीं है। इसलिए पाकिस्तान को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बारिश, हवाओं या समुद्री लहरों के मामले में पाकिस्तान को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। रिपोर्टों से पता चलता है, कि उष्णकटिबंधीय तूफान ओखी अरब सागर में फैल गया ह...
बाजरा की रोटी और। ......... बाजरे के आटे की रोटी, लहसुन की मिर्च वाली चटनी, हरी प्याज का रायता। सबसे पहले आपको बाजरे का आटा लेना होगा। फिर जैसे गेहूं के आटे को रोटी बनाने के लिए गुंथा जाता है, वैसे न गूंथ के केवल एक रोटी में समाये उतना आटा लेना है। उसमे धीरे धीरे इतना पानी मिलाओ की आटा एक गोल मोल पिंड का आकर ले सके। न ज्यादा गीला ना ज्यादा सख्त। अब इसे धीरे धीरे रोटी की सकल देने के लिए अपने दोनों हाथों में फ़ैलाने की कोशिश करें। कभी इस हाथ में कभी उस हाथ में। यह प्रक्रिया जल्दी जल्दी एक हाथ से दूसरे हाथ में जारी रखे। देखते जाएँ रोटी अपनी सकल ले रही है। वैसे यह प्रेक्टिस से आसानी से हो जाता है। एक दो बार कोशिश करेंगे तो आसान हो जायेगा। अब जब रोटी अपनी गोल सकल ले ले तो इसे गर्म तवे पर डाल दें। उचित रहेगा तवा चूल्हे पर हो और आपके पास पर्याप्त लकड़ी (सूखी लकड़ी ) हो। आंच ज्यादा मंदी और ज्यादा कम न हो। चूल्हे में पर्याप्त मात्रा में खीरे (सुखी लकड़ी जलने के बाद बने चारकोल जो लाल गर्म) हों। अब जब इतना हो जाये तो तवे पर रोटी डाल दे। धीरे धीरे ...
*पृथ्वी का अमृत.. सफ़ेद तिल कला तिल तिल का तेल...* ( 5 मिनिट का समय निकाल कर पोस्ट को जरूर पढ़े ) यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है, और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं, क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है। तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे। तिल के तेल में इतनी ताकत होती है, कि यह पत्थर को भी चीर देता है। प्रयोग करके देखें.... आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा का का वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... लेकिन... अब आप उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर...
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